रुठते नही है अब कि मनायेगा कौन
पुछने उदासी के सबब आयेगा कौन
बांध रखा है घर से रुहानी रिश्तों ने
वरना दीवारों से मिलने जायेगा कौन
बैठा है दर्द पहलू में जैसे यार है
इतना करीबी रिश्ता निभायेगा कौन
करते नही नुमाइश अपने जख्मों की
मरहम रिसते जख्म लगायेगा कौन
है रात कोई और इस रात के आगे
चांद से जाकर अब ये बतायेगा कौन
जब लगा जिंदगी पढ लिया है तुम्हें
खुद पे हंसी आयी आजमायेगा कौन
कतर दिये हैं "पर" हमने ख्वाहिशों के
"बेपर" परिंदों को अब उडायेगा कौन
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