इक उम्र के बाद हाल नही पुछा जाता
भंगारो पे यूँ सवाल नही पुछा जाता
उधड ही जाती है परतें पुरानी होने पे
दीवारों से ये मलाल नही पुछा जाता
गुजरे है उनकी रातें नर्म लिहाफों में
शह्र कौन है बे हाल नही पुछा जाता
हर रुप में बरसे महशर दर्द है इतना
अब सुकून ए हाल नही पुछा जाता
आरजू है खुशरु ख्वाहिशों की यहां
जरुरते जब्र कमाल नही पुछा जाता
No comments:
Post a Comment