Friday, 9 December 2016

जिंदगी तुने आजमाया देर तक

जिंदगी  तुने आजमाया  देर तक
सोंच ये दिल  मुस्कुराया  देर तक

ख्वाब थे शीशे के सब पिघल गये
आंच ने दिल को जलाया देर तक

मुख्तलिफ  सी  हवा के  दरमियां
इक  दीया  टिमटिमाया  देर  तक

हौसलो  के  आखिरी  मुकाम पर
वो  परिंदा  फड़फड़ाया  देर  तक

दिल को बहलाने गये थे बज्म में
तेरी महफिल ने  रुलाया देर तक

चाहतें  थी  चांद  छूने  की  मगर
जरुरतों ने  हमे  भगाया  देर तक

गुनगुनाता  जा  रहा  था   फकीर 
धूप  रहता है  ना  साया  देर तक

No comments:

Post a Comment