जिंदगी तुने आजमाया देर तक
सोंच ये दिल मुस्कुराया देर तक
ख्वाब थे शीशे के सब पिघल गये
आंच ने दिल को जलाया देर तक
मुख्तलिफ सी हवा के दरमियां
इक दीया टिमटिमाया देर तक
हौसलो के आखिरी मुकाम पर
वो परिंदा फड़फड़ाया देर तक
दिल को बहलाने गये थे बज्म में
तेरी महफिल ने रुलाया देर तक
चाहतें थी चांद छूने की मगर
जरुरतों ने हमे भगाया देर तक
गुनगुनाता जा रहा था फकीर
धूप रहता है ना साया देर तक
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