देखे जो दूर से तो सभी अच्छा दिखाई दे
उम्र ढली फिर भी दिल बच्चा दिखाई दे
बोलते है तो बस हकीकत जान पड़ता है
मकसद में मगर मक्कारी सा दिखाई दे
नफरतों के बीज वो बो रहे हैं इस कदर
अम्न के दुश्मनों का ही हिस्सा दिखाई दे
साजिशों के जाल फंस गया इक मेमना
यकीनन फिर से नया किस्सा दिखाई दे
आजादी के भी मायने कितने बदल गये
बयानगी के पीछे सब गद्दारी सा दिखाई
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