हुई जाती है अब तो मुल्क में गुनहगार तस्वीरें
करने लगी हैं जज्बातों का कारोबार तस्वीरें
छुपा जाती है बहुत से दर्द ये अपने भीतर में
बहुतो के लिए अब बन गई इश्तेहार तस्वीरें
चौराहे पर इन्हें कोई बेचता है रोटी कमाता है
गरीबों के मुंह का निवाला है ये लाचार तस्वीरें
कितनी ही जुर्म की गवाही भी बन जाती है ये
कई मुंसिफो का भी बन रही है आधार तस्वीरें
बारिशों में बचपन के संग दिल को बहलाती है
बन जाती हैं जब नन्हे हाथ में पतवार तस्वीरें
खुशनुमा और उदासी के लमहात की सुरत में
करती रहती है जज्बातों का इजहार तस्वीरें
कह जाती है बहुत कुछ खामोश सी रहके भी
रखती है हमारी जिंदगी से ही सरोकार तस्वीरें
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