ज़मीन से उगती है या आसमाँ से आती है
ये बे-इरादा सी उदासी कहाँ से आती है
सुलगती रहती है धुंआ धुंआ सा उठता है
दहक रिश्तों में जरा सी कहा से आती है
छलके पडते है दिदार की चाहत में आंसू
आंखें ये अरसे से प्यासी कहां से आती है
निहारती रहती हैं गुजरे निशान कदमों के
उम्मीदें अधूरी हैरां सी कहां से आती है
भटकते भटकते थक सिरहाने आ बैठी है
देखिए नींदे परेशां सी कहां से आती है
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