Wednesday, 2 March 2016

सुखे फुल के जैसे रिश्ते खुशबू से उन्हें मिलाये कौन

सुखे फुल के जैसे रिश्ते खुशबू से उन्हें मिलाये कौन
कुछ अहसास सिरहाने बैठे नींद में उन्हें सुलाये कौन

तिनका पत्ता खुशबू सब ही     आंधियों में उड जाते
दर्द  दिलो मे पसरा हुआ है आंधी तक ले जाये कौन

दिन ढलते ही आवारा बनकर मारा मारा  फिरता है
काली चादर ओढे सोया सुब्ह सुरज को जगाये कौन

दो पहर में साया अपना    कद से भी ऊंचा हो गया
दो पहर बाद फिर साये को खुद ही से मिलाये कौन

हरदम ही धुंए में जलती है   मां की आंखें सच नहीं
बेटे की मुश्किलों में भी   बहते हैं आंसू जताये कौन

उधार की मुस्कान देखकर   अपने बाप के चेहरे पर
माँ के पल्लू में छिप बेटी रोती है ढांढस बंधाये कौन

वक्त की झोली से कुछ लम्हें चुराये थे जीने के लिए
फटी जेब से कहां गिर गए उनकी खबर बताये कौन

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