Monday, 21 March 2016

सिसकियों के मोल हालात बिका करते हैं

सिसकियों के मोल हालात बिका करते हैं
कुछ बे जवाब से सवालात बिका करते हैं

शहर की रंगीन   मिजाजी के दरमियां ही
बस्ती में कितने    जज्बात बिका करते हैं

हर मोड़ पे जलील  होती ये मुफलिसीयां
हर कदम कितने  औकात बिका करते हैं

भूख की कीमत खुब वो मां ही जानती है
दुध वास्ते जिसके लमहात बिका करते हैं

बेटी के हाथ पीले   करने के जुगत में ही
बाप की ताउम्री हासिलात बिका करते हैं

मजबूरियों के चादर ओढ के रोज कितने
उसूल बेमोल ही वाहियात बिका करते हैं

मुल्क में सियासत लाशों पे रोटी सेंकती है
कुर्सी की कीमत यहां जात बिका करते हैं

चौराहो पे दुआ  की दुकान मिल जाती है
चंद सिक्को में ही आफात बिका करते हैं

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