सिसकियों के मोल हालात बिका करते हैं
कुछ बे जवाब से सवालात बिका करते हैं
शहर की रंगीन मिजाजी के दरमियां ही
बस्ती में कितने जज्बात बिका करते हैं
हर मोड़ पे जलील होती ये मुफलिसीयां
हर कदम कितने औकात बिका करते हैं
भूख की कीमत खुब वो मां ही जानती है
दुध वास्ते जिसके लमहात बिका करते हैं
बेटी के हाथ पीले करने के जुगत में ही
बाप की ताउम्री हासिलात बिका करते हैं
मजबूरियों के चादर ओढ के रोज कितने
उसूल बेमोल ही वाहियात बिका करते हैं
मुल्क में सियासत लाशों पे रोटी सेंकती है
कुर्सी की कीमत यहां जात बिका करते हैं
चौराहो पे दुआ की दुकान मिल जाती है
चंद सिक्को में ही आफात बिका करते हैं
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