खंडहरनुमा उस घर में कौन है
आप तो बाहर है भीतर में कौन है
सभी तो यहां पत्थर से दिखते हैं
आवाज ये कैसी शहर में कौन है
जेहन के साथ नही है जुबां तेरी
दिल में है कौन नजर में कौन है
कितनी दुआएं तेरे संग चली थी
तुने कहां देखा सफर में कौन है
दहलीज़े राहें तकती है आज भी
घर रिश्ते ढूंढता किधर में कौन है
कितनी उम्मीदे दबी है कदमों तले
कभी देखना तेरे असर में कौन है
नही आते साथ रास्ते मिलने वाले
पलट के देखना लश्कर में कौन है
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