Monday, 12 November 2018

ये जिंदगी को समझ ले तू ख्वाब से पहले

ये जिंदगी को समझ ले तू ख्वाब से पहले
लगे  हैं  खूब  हंसी  ये  अजाब  से पहले

उधार की है  खुशी  चार दिन की है सांसे
फकत  ये जान ले तू भी हिसाब से पहले

नजर है आते सभी  साफ साफ दुनिया में
तमाम   खेल   मदारी    सराब  से पहले

बखूब   जान ले   किरदार  कैसे  कैसे हैं
ये आदमी  के  यहां  पर  नकाब से पहले

शहर में ईद का जिम्मा  तो चांद पे ही था
वो छत पे  रात  दिखा  माहताब से पहले

लगाए  आस थे  हम  खूब जिंदगी से भी
मिले हैं  खार ही  हमको गुलाब से पहले

अदब से पेश  वो आने लगा है अब बेहद
सलाम  खत में लिखा है  जवाब से पहले

जुबां जुबां  पे है किस्सा तमाम उनका ही
शहर में  खूब है  चर्चा  किताब  से पहले

हमें  यकीन था  की  ख्वाब में वो आयेंगे
मगर  ये नींद  न आयी  जनाब  से पहले

उफक में जो ये चमक सा दिखाई देता है
नये सहर की है  दस्तक ये बाब से पहले

मलाल  देख  तू  अपने  तमाम फुर्सत से
वो आदमी था भला कल खराब से पहले

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