खुशी के दौर में लहजा नही बदलते हम
मिजाज नर्म जरा सा नही बदलते हम
ख़राशें वक्त की पड़ती जरुर चेहरे पर
मगर लिहाज का रुतबा नही बदलते हम
करार पाने को दर दर भटकते रहते हैं
महज तलाश में सहसा नही बदलते हम
सुकून चैन मिले बस यही तमन्ना है
इसी के वास्ते इतना नहीं बदलते हम
नयी नसल है नये है जमाने के मंजर
अदब लिहाज सलीका नही बदलते हम
थकन के बोझ है छाले है पांव में फिर भी
शिकम के वास्ते रस्ता नही बदलते हम
उम्मीद हसरतें आंसू उदास तन्हाई
मलाल देख के रिश्ता नही बदलते हम
ए जिंदगी तेरे जलवों से खौफ खाते हैं
मगर ये तौर तरीका नही बदलते हम
सिसकते रहते हैं छाले ये पांव के लेकिन
सुकून वास्ते रस्ता नही बदलते हम
जुदा है जात उसूलों इमां से सबका ही
ये मोजिजा से अकीदा नही बदलते हम
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