ये जिंदगी को समझ ले तू ख्वाब से पहले
लगे हैं खूब हंसी ये अजाब से पहले
उधार की है खुशी चार दिन की है सांसे
फकत ये जान ले तू भी हिसाब से पहले
नजर है आते सभी साफ साफ दुनिया में
तमाम खेल मदारी सराब से पहले
बखूब जान ले किरदार कैसे कैसे हैं
ये आदमी के यहां पर नकाब से पहले
शहर में ईद का जिम्मा तो चांद पे ही था
न आए छत पे सनम माहताब से पहले
लगाए आस थे हम खूब जिंदगी से भी
मिले हैं खार ही हमको गुलाब से पहले
अदब से पेश वो आने लगा है अब बेहद
सलाम खत में लिखा है जवाब से पहले
जुबां जुबां पे है किस्सा तमाम उनका ही
शहर में खूब है चर्चा किताब से पहले
हमें यकीन था की ख्वाब में वो आयेंगे
मगर ये नींद न आयी जनाब से पहले
उफक में जो ये चमक सा दिखाई देता है
नये सहर की है दस्तक ये बाब से पहले
मलाल देख तू अपने तमाम फुर्सत से
वो आदमी था भला कल खराब से पहले
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