छोड़िए फिक्र क्या किजिए
आप तो बस मजा किजिए
क्या हुआ कुछ परेशां है गर
रोज का है दफा किजिए
खैरियत की तो मत पुछिये
सब भला हो दुआ किजिए
हादसे हर कदम मुंतजिर
बस संभल कर चला किजिए
कुछ इतर सोंचिए खुद सेे भी
और का भी भला किजिए
बातें कल की भुला दिजिए
आज अब कुछ नया किजिए
अम्न कायम रहे मुल्क में
रब से बस ये दुआ किजिए
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