शिकायतों से भरी बद जुबान थोड़ी है
है दिल की बात ये साहब बखान थोड़ी है
मुगालतो की ये कोरी उड़ान थोड़ी है
ये जोश जोश में जारी बयान थोड़ी है
बहुत ही सोच समझ कर कदम बढ़ाया है
हमारे शेर भी इतने नदान थोड़ी है
लहू से सींच के हमने वतन संवारा है
ये लूट-पाट की सस्ती दुकान थोड़ी है
ये मेरा मुल्क मेरे पुरखों की विरासत है
ये कागजों में खिंचे कुछ निशान थोड़ी है
जिगर है जान है दिल के बहुत करीब है ये
हमारा मुल्क किराये मकान थोड़ी हैं
जो अपने मतलबों के तौर बांट ले कोई
सहल अब इतना भी हिंदोस्तान थोड़ी है
जो वक्ती तौर पे दीनो इमान बनते हो
अज़ीमो शान वतन की ये शान थोड़ी है
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