सत्ता की सब रेस है लाला
रावण मासूम भेष है लाला
आग लगा दो मुल्क में सारे
रहबर का आदेश है लाला
कौन कमीना कितना देखो
खुला सब संदेश है लाला
अभिव्यक्ति की आजादी है
लेकिन कुछ निर्देश है लाला
मेरी हद पर आंच न आए
इतनी ही हद शेष है लाला
मोहरा मासूमों को बनाकर
खेल रहे कुछ चेस है लाला
आईन की दुहाई है पर
आईन बस शो केश है लाला
खुद का ही नुकसान करे जो
ये कैसा आवेश है लाला
पत्थर हाथों है जो तेरे
ये केवल भावेश है लाला
क्या है कल को देने को कुछ
खंडहर के अवशेष है लाला
कुछ तो सबक लो अपने कल से
उन्मादी बस केस है लाला
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