Thursday, 26 December 2019

दर्द देकर मुस्कुराना छोड़ दो

दर्द  देकर     मुस्कुराना    छोड़  दो
हर कदम  पर   आजमाना छोड़ दो

साफ  कह दो दिल में जो है आपके
इक  नया  हर  दिन बहाना छोड़ दो

सर्द मौसम  जम  गये अहसास सब
बर्फ  रिश्तों में    जमाना   छोड़  दो

आईना  भी   कश्मकश  में है बहुत
चेहरे पर  चेहरा   लगाना  छोड़  दो

गर  हकीकत  में    गवारा  ही  नही
ख्वाब में   भी आना जाना छोड़ दो

हसरतों  की   झुमा झटकी है बहुत
दिल में   उम्मीदें   जगाना  छोड़ दो

पुछते  हो   तुम   वफ़ा  के   बारे में
मसखरी  यूँ   जाने जाना   छोड़ दो

मुश्किलें  हर सुब्ह  है  दहलीज पर
जी में  आता है   ठिकाना  छोड़ दो

काश अरमानों का  हो  खरीदार तो
उसके दर ही सब खजाना छोड़ दो

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