दर्द देकर मुस्कुराना छोड़ दो
हर कदम पर आजमाना छोड़ दो
साफ कह दो दिल में जो है आपके
इक नया हर दिन बहाना छोड़ दो
सर्द मौसम जम गये अहसास सब
बर्फ रिश्तों में जमाना छोड़ दो
आईना भी कश्मकश में है बहुत
चेहरे पर चेहरा लगाना छोड़ दो
गर हकीकत में गवारा ही नही
ख्वाब में भी आना जाना छोड़ दो
हसरतों की झुमा झटकी है बहुत
दिल में उम्मीदें जगाना छोड़ दो
पुछते हो तुम वफ़ा के बारे में
मसखरी यूँ जाने जाना छोड़ दो
मुश्किलें हर सुब्ह है दहलीज पर
जी में आता है ठिकाना छोड़ दो
काश अरमानों का हो खरीदार तो
उसके दर ही सब खजाना छोड़ दो
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