दिल तो बहुत मिले मगर दिलबर नही मिले
इन आंखो को चाहतो के मंजर नही मिले
दोजख के रास्ते तो दिखाते है सब मगर
जन्नत की ओर जाने को रहबर नही मिले
यूँ तो मकां बहुत है तेरे शहर मे फिर भी
लायक मगर कोई भी हमे घर नही मिले
मिले बहुत जहां मे हमदम से भी जियादा
दम तक जो साथ देते वो बसर नही मिले
फुटपाथ पर भी होती बसर है जिंदगी कुछ
मेरे देश के नुमाइंदे कभी बेघर नही मिले
अकीदते इंसान की बुतो मे जान भर रही
हम सजदे मे थक गये वो पत्थर नही मिले
No comments:
Post a Comment