Thursday, 8 October 2015

हंसी दिल पे मलाल रखते है

हंसी दिल पे मलाल रखते है
वो शख्सियत कमाल रखते है

जवाब खुद कभी बन न सके
जुबां पे फजूल सवाल रखते है

करते है जो बाते अम्न चैन की
शहर मे हरदम बवाल रखते है

करते है जमाने की झंडाबरदारी
खुद की बिरादरी बेहाल रखते है

कहते है जो बेईमानी हराम है
कहां वो कमाई हलाल रखते है

सीखाते है वो जीने का सलीका
वो खुद ही बेढंगी चाल रखते है

सभी की गुजरती मेरे शहर मे
हैसियत सभी बहरहाल रखते है

No comments:

Post a Comment