सारी शिकायतें ले आ हिसाब जोड़ के
अपने सितम भी तो ला जनाब जोड़ के
भुले बिसरे सारे लम्हो को ला बटोर कर
सारे मसाइल रख फिर तू सराब जोड़ के
शफक बारिश बादलों से भी पुरी न हुई
बनी मुकम्मल धनक आफताब जोड़ के
हर सूं है बेतरतीब बिखरे से तेरे खयाल
रखा है इक टूटा हुआ महताब जोड़ के
आने नही देती आंखे इनको सारी रात
नींदे बैठी दहलीज चंद ख्वाब जोड़ के
उस टूटे झोपड़े में बरसा है झुम के
भेजा ये कैसा मेरे खुदा सिहाब जोड़ के
मसला नही है कहीं भी दैरो हरम का
सियासत ने रखा है ये हुबाब जोड़ के
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