Wednesday, 17 October 2018

यूँ नाम जिंदगी का डुबाया न जाएगा


यूँ  नाम  जिंदगी  का  डुबाया  न जाएगा
हमसे  तो  मुलम्मा  ये निभाया न जाएगा

आदत  में है  शुमार  के  सजदा करे तेरा
इतने  सहज  ये शौक  भुलाया न जाएगा

करता है  वो सितम  तो बड़े शौक से करे
हमसे  मगर  कभी वो  सताया न जाएगा

तार्रुफ  तो   कमाल  का है  वाह जिंदगी
आज़ार    बेशुमार    सुनाया   न जाएगा

आयी है  आज  मां मेरी कन्या के रुप में
निश्छल छवि सहज ये भुलाया न जाएगा

सब ही  नकाब  पहने  हुए  हैं  जहान में
हमसे  ये  झूठ  बात  निभाया  न जाएगा

रुठी  रही है  उम्र  तलक  हमसे  जिंदगी
इतनी  सी बात  हमसे  मनाया न जाएगा

रहती है  तिरगी सी  वो बस्ती में हर घड़ी
भूले भी  शम्स से  वहां  जाया न जाएगा

मिजाज   पूछ   लेते हैं  वो  दूर  बैठकर
ऐसे तो  हमसे कुछ भी बताया न जाएगा

लहजा  बता रहा है  कि  मिजाज गर्म है
रूठे  सनम है  हमसे  मनाया  न जाएगा

बस्ती अदद वो जल गई तुम्हारे  फूंक से
चुल्हा  कोई   कहेंगे  जलाया न जाएगा

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