यूँ नाम जिंदगी का डुबाया न जाएगा
हमसे तो मुलम्मा ये निभाया न जाएगा
आदत में है शुमार के सजदा करे तेरा
इतने सहज ये शौक भुलाया न जाएगा
करता है वो सितम तो बड़े शौक से करे
हमसे मगर कभी वो सताया न जाएगा
तार्रुफ तो कमाल का है वाह जिंदगी
आज़ार बेशुमार सुनाया न जाएगा
आयी है आज मां मेरी कन्या के रुप में
निश्छल छवि सहज ये भुलाया न जाएगा
सब ही नकाब पहने हुए हैं जहान में
हमसे ये झूठ बात निभाया न जाएगा
रुठी रही है उम्र तलक हमसे जिंदगी
इतनी सी बात हमसे मनाया न जाएगा
रहती है तिरगी सी वो बस्ती में हर घड़ी
भूले भी शम्स से वहां जाया न जाएगा
मिजाज पूछ लेते हैं वो दूर बैठकर
ऐसे तो हमसे कुछ भी बताया न जाएगा
लहजा बता रहा है कि मिजाज गर्म है
रूठे सनम है हमसे मनाया न जाएगा
बस्ती अदद वो जल गई तुम्हारे फूंक से
चुल्हा कोई कहेंगे जलाया न जाएगा
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