Monday, 8 October 2018

जिंदगी में ये अलग सा हादसा रह जाएगा

जिंदगी में  ये  अलग सा   हादसा  रह जाएगा
आप से  मिलना  हमारा  ख्वाब सा रह जाएगा

सांस भी  चुभने  लगी है  धड़कनों के दरमियां
क्या पता कब तक खुदाया मुब्तिला रह जाएगा

राह तकते  थक गई  आंखें तो  आंसू चल पड़े
ढुंढने को  आपको  अब क्या बता  रह जाएगा

सुर्खियां  बनने लगी है  आजकल तो  फब्तियां
कोई अब  किरदार कैसे  पाकिजा  रह जाएगा

आज के  अखबार में है  ये छपी  ताजा खबर
आदमियत  अब शहर में  नाम का रह जाएगा

या हरम   औ  दैर के  आगे न   कोई  बात है
ये सबब  सब फितने है  सब धरा  रह जाएगा

हुक्मरां को फिक्र क्या  रोटी नही तो क्या हुआ
सुर्खियों में  कल  यही  मुद्दा  नया  रह जाएगा

अब किसी से मिलना हो तो संभल कर मिलना
कोई गैरा  क्या पता कल  काबीना  रह जाएगा

थक गया  सूरज बिचारा  तो उफ़क के घर चला
डूब कर  सूरज मरा तो  बस शफ़क़ रह जाएगा

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