जिंदगी में ये अलग सा हादसा रह जाएगा
आप से मिलना हमारा ख्वाब सा रह जाएगा
सांस भी चुभने लगी है धड़कनों के दरमियां
क्या पता कब तक खुदाया मुब्तिला रह जाएगा
राह तकते थक गई आंखें तो आंसू चल पड़े
ढुंढने को आपको अब क्या बता रह जाएगा
सुर्खियां बनने लगी है आजकल तो फब्तियां
कोई अब किरदार कैसे पाकिजा रह जाएगा
आज के अखबार में है ये छपी ताजा खबर
आदमियत अब शहर में नाम का रह जाएगा
या हरम औ दैर के आगे न कोई बात है
ये सबब सब फितने है सब धरा रह जाएगा
हुक्मरां को फिक्र क्या रोटी नही तो क्या हुआ
सुर्खियों में कल यही मुद्दा नया रह जाएगा
अब किसी से मिलना हो तो संभल कर मिलना
कोई गैरा क्या पता कल काबीना रह जाएगा
थक गया सूरज बिचारा तो उफ़क के घर चला
डूब कर सूरज मरा तो बस शफ़क़ रह जाएगा
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