Friday, 11 December 2015

रुकती नहीं किसी के वास्ते चलती रहती है

नही रूकती किसी की वास्ते चलती रहती है
जिंदगी बस रूह के लिबास बदलती रहती है

अजीब है ये दुनिया बहुत तवायफ़ों की तरह
अपने चाहने वाले अकस्मात बदलती रहती है

मतलब भर की ही होती है सारी रिश्तेदारियां
वक्त देख वो अपने मुलाकात बदलती रहती है

सियासत के खेल मे अहसासों की बिसात क्या
वो तो मेयार देख कर जज्बात बदलती रहती है

बदहवासी के हालात से शख्सियत न आंकिये
यहां सुबह औ शाम मे औक़ात बदलती रहती है

नियत बदलते लोगो की देर नही लगती है अब
मालोज़र देख के ये दिन रात बदलती रहती है

शहर मे जिस निजाम पे हिफाजत का जिम्मा है
महज खानापूर्ति मे तहकीकात बदलती रहती है

आफतो से आदमियत का राब्ता बहुत  पुराना है
सुरत वही होती है मुश्किलात बदलती रहती है

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