रफ्ता रफ्ता अब सारे किरदार बदल गए
नये दौर में सब अपने त्यौहार बदल गए
ईद की सेवईयां गुम दीवाली से सारे दीप
होली की रंगीनीयों के इश्तेहार बदल गए
मिट्टी से मिट्टी का भी अब रिश्ता टूट गया
सौंधी सौंधी खुशबुओं के बयार बदल गए
आस्ताने पर जो बंदे कल सजदा करते थे
उनकी भी इबादत के अब दयार बदल गए
भरे पुरे घर में इक बड़ा सा आंगन होता था
दीवार खींच गई बीच तो परिवार बदल गए
नाजो में पली चिड़िया घर भर की लाडली
ससुराल जो पहुंची बेटी तो संसार बदल गए
बाबुल से भी मिलती है तो पति को पुंछ के
बिदा होते ही अब बेटी के हकदार बदल गए
बाबूजी के इशारे से सारा घर मौजूद होता था
वसीयत बनते अब सबके सरोकार बदल गए
लूट खसोट औ झुठ फरेब की ही है बस खबरे
खबरे वही सब बासी बस अखबार बदल गए
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