Friday, 25 December 2015

जिसकी जो मर्जी है उत्सव मनाईये

जिसकी जो मर्जी है  उत्सव मनाईये
अर्ज किसी के मत दिल को दुखाईये

सैंवई हो गुजिये हो चाहे मीठे में केक
जुबां पे हर मज़हब के स्वाद सजाईये

मिलिये लोगों से महज जुबां तक नहीं
दिल से दिल मे  जाने की राह बनाईये

अपने परवर का सदा झंडा बुलंद रखे
अम्नो चैन के गीत  भी तो गुनगुनाईये

साजिशे बंद हो जहरीली फिजाओं की
खुशबुओं की भी मुल्क में हवा बहाईये

ईद में हो राम राम   दीवाली मे सलाम
आपस में इक दुजे के त्योहार मनाईये

नये साल मे सबको खुशियां हासिल हो
इक दुजे के लिए ऐसे अरमान सजाईये

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