जिसकी जो मर्जी है उत्सव मनाईये
अर्ज किसी के मत दिल को दुखाईये
सैंवई हो गुजिये हो चाहे मीठे में केक
जुबां पे हर मज़हब के स्वाद सजाईये
मिलिये लोगों से महज जुबां तक नहीं
दिल से दिल मे जाने की राह बनाईये
अपने परवर का सदा झंडा बुलंद रखे
अम्नो चैन के गीत भी तो गुनगुनाईये
साजिशे बंद हो जहरीली फिजाओं की
खुशबुओं की भी मुल्क में हवा बहाईये
ईद में हो राम राम दीवाली मे सलाम
आपस में इक दुजे के त्योहार मनाईये
नये साल मे सबको खुशियां हासिल हो
इक दुजे के लिए ऐसे अरमान सजाईये
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