मुगालता ये रहा हमको एहतराम के बाद
अब तो गुजरे हयात चैन से ईनाम के बाद
यूं तो हर लम्हा तेरी याद में बोझल गुज़रा
बेहिसाबी से तुझे ढुंढा किये शाम के बाद
हादसा कोई भी कर गुजरे जमाने में कहीं
जिक्र अपना वहां आया इल्जाम के बाद
इससे बढ कर जफा की सुरत क्या होगी
खत के टुकड़े उनने भेजा पयाम के बाद
कौन से राब्ता के सर भला तोहमत कर दे
हर किसी ने हमे रुलाया है काम के बाद
जीते जी हमको जमींदोज कर रहे हैं वही
वसीयत में जिन्हे हक है मेरे नाम के बाद
सफर में चलने की तैयारी हो गई अपनी
पूछने आये अदायत सब इंतजाम के बाद
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