Saturday, 26 December 2015

मुगालता ये रहा हमको एहतराम के बाद

मुगालता ये रहा हमको  एहतराम के बाद
अब तो गुजरे हयात चैन से ईनाम के बाद

यूं तो हर लम्हा तेरी याद में बोझल गुज़रा
बेहिसाबी से तुझे ढुंढा किये शाम के बाद

हादसा कोई भी कर गुजरे जमाने में कहीं
जिक्र अपना वहां आया  इल्जाम के बाद

इससे बढ कर जफा की सुरत क्या होगी
खत के टुकड़े उनने भेजा पयाम के बाद

कौन से राब्ता के सर भला तोहमत कर दे
हर किसी ने हमे रुलाया है  काम के बाद

जीते जी हमको जमींदोज कर रहे हैं वही
वसीयत में जिन्हे हक है मेरे नाम के बाद

सफर में चलने की तैयारी  हो गई अपनी
पूछने आये अदायत सब इंतजाम के बाद

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