अर्जी सुनी है उनकी जुबां मेरे नाम की
आने लगी है छन के दुआ मेरे नाम की
शायद उन्हें भी इश्क का मुगालता हुआ
कदर उसे थी कल को कहां मेरे नाम की
अपनी भी हैसीयत मे इजाफा जरा हुआ
खुलने लगी चाहत की दुकां मेरे नाम की
तोहमत किसी पे यूं ही लगाना फिजूल है
आकर के कुछ खता तो बता मेरे नाम की
न हो यकीं जो मेरी मुहब्बत तो देख ले
खुद मे भी कुछ निशानियां मेरे नाम की
नफरत की बस्तियों से गुजरा हुआ हुँ मै
सदके में मालोजर भी लुटा मेरे नाम की
दिल का सुकून उनसे कुरबत की आस है
अब इत्ती तो इनायत हो खुदा मेरे नाम की
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