वो बाप किस तकलीफ से हमे पालता रहा
रह रहकर उम्र भर मुझे ये दर्द सालता रहा
बच्चो के पेट भर जाए इस जद्दोजहद मे ही
ता जिंदगी वो अपनी खुशी को टालता रहा
किरदार कोई घर मे बेलिबास न रहने पाए
ये सोच फटी बनियान मे दिन निकालता रहा
हर इक की जरूरतो का हरदम खयाल रखा
बखुब सलीके से वो हर रिश्ते संभालता रहा
बेअदबी औ दिलफरेबी दुनिया से छिपा कर
बाअदबी जहनीयत के सांचे मे ढालता रहा
बडे होने पर जरूर वो करेंगे मेरी तिमारदारी
उस बेचारे को उम्र भर ऐसा ही मुगालता रहा
मुफलिसी का कभी हमे अहसास न होने दिया
हंस हंस के सारी मुश्किले खुद ही झेलता रहा
धूप मे भी वो दौडा कभी छांव देख नही ठहरा
उबड खाबड रास्तो मे ता हयात डोलता रहा
यूँ ही खुशी औ गम गुजार दी उसने ये जिंदगी
उम्र के पडाव मे कभी जीतता कभी हारता रहा
जिनकी खातिर हर लम्हा घुट घुट करके गुजरा
आज उन रिश्तो की खुद से बेरुखी देखता रहा
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