इस शहर को जाने हुआ क्या है
आदमियत खो गई वजा क्या है
साजिशो का यूं दौर चल पड़ा है
भूल गए हैं सब कि दुआ क्या है
खोई हुई सी है जिंदगी इस कदर
नही मिलती खबर कहा क्या है
घर घर देखी हमने अदावत ऐसी
ना मालूम लोगों में रिश्ता क्या है
आजिजे जुल्मियत सहमे लोग
चौराहे पे मौत नहीं देखा क्या है
ठिठुरी काया को कंबल ओढा के
पूछना फकीर से फरिश्ता क्या है
अजमत बेच देते हैं दैरो हरम की
वो बंदे पुछते है कि धोखा क्या है
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