त्योहारो के बहाने भी कुछ काम नही आये
रिश्तो से मुलाकात किये अरसा गुजर गया
रहता था वो हरदम ही अपनो की भीड़ मे
वक्त ने ली करवट कुछ यूँ तन्हा गुजर गया
कम्बख्त दिल ताउम्र ही मुंतजिर बना रहा
राहो को तकते एक एक लम्हा गुजर गया
हम मोतियों के मानिंद रिश्ते जोडते रहे
वाहियात से काम मे वक्त बेजा गुजर गया
कमाने के दौर थे जब आशिकी करते रहे
बरबाद हुई जिंदगी बस मौका गुजर गया
आस्ताने दैरो हरम भी ढुंढकर हम आ गये
मिला नही जाने कहां फरिश्ता गुजर गया
बेसुध होकर गिर पड़ा वो भुखा चौराहे पर
अनदेखा करके उसको हर इंसा गुजर गया
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