बेचैन दिख रहा है मुझे गोदी मे सुलाने वाला
खामोश होकर बैठा है वो लोरियां गाने वाला
जरूरते रोज बढती जाती है जेब छोटे हो रहे
कशमकश मे उलझा है घर को चलाने वाला
कैसी ख्वाहिशें दफ्न करे कौन सी शय टाले
उधेड़बुन मे फंस हुआ है बाजार जाने वाला
पुराने से घर के आंगन मे इक बुढा सा दरख्त
खडा पुरानी यादे ले खो गया उसे लाने वाला
बुढे दरख्त की शाखो पे बांधी थी यादे कभी
झुला यादो का बंधा है न मिला झुलाने वाला
कुछ अजीज अपने भी इसी शहर मे रहते है
रास्ते खड्डे बडे है उनके घर तक जाने वाला
रिश्तो की भीड़भाड रिश्ते यूँ ही बन जाते है
कहने को है नाते ये नही कोई निभाने वाला
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