सीधा सादा सा बंदा भी अब खबर मे रहता है
मुद्दआ जबसे बना है निवाला नजर मे रहता है
थोडी खुशियाँ हासिल करने किश्तों पे जीता है
कतरो मे है बंटा हुआ हर पल कबर मे रहता है
आज उसकी बस्ती मे खुब भीड़ भरी रहती है
कोई न जाता था कलतक वो जिधर मे रहता है
कल जो बेचारा आम था खास बन बैठा है वो
चुनावी दौर मे वो सियासत के असर मे रहता है
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