Tuesday, 24 November 2015

नजर मिलते ही दिल मे उतर जाते हैं

नजर मिलते ही दिल मे उतर जाते हैं
कमाल खुब इक लम्हे मे कर जाते है

संजो के रखे थे अरमान हमने सीने मे
बेखयाली मे चिंदी चिंदी कतर जाते है

गजब है अव्वल वो कभी मिलते नही
जो मिलते है तो कतराते गुजर जाते हैं

सुर्ख फुलो सी महक उठती है सब राहे
नर्म पैरो चहलकदमी मे जिधर जाते हैं

बेहद शातिरी से वो हर कतल करते है
मुस्कुरा के वो सादगी से मुकर जाते हैं

जिन्होंने देहरी भी न लांघी थी घर की
तन्हाई के संग उल्फत ए सफर जाते हैं

इश्क की गलियों का पता जानते नही
बदहवासी मे वो अंजाने शहर जाते हैं

इश्क की शान मे गुस्ताखी न हो जाए
बेहद सलीके से हम उनके घर जाते हैं

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