खुशी देर तक किस शख्स के हिस्से मे रहती है
हंसी भी लरजते हुए गरीब के चेहरे मे रहती है
जमाने की बदली हुई हवाओ से डर लगता है
बिटिया अक्सर गरीब घर की परदे मे रहती है
हालात कुछ यूँ है कि घर के चुल्हे ठंडे हो गये
बिलखते बच्चे देख माँ हरदम गुस्से मे रहती है
भीड़ लगी है अपनो की पर भी बेगाने है हम
कुछ हमारी नातेदारी रिश्तो के मेले मे रहती है
बेमोल वफाऐ अब तो बिकने लगी बाजार मे
कुछ उसूले बदहवास होकर रस्ते मे रहती है
ख्वाबों के सारे आशियां जर्रा जर्रा बिखर गए
हमारी अधुरी ख्वाहिशें अब टुकड़े मे रहती है
चाहतो के दौर कभी के खत्म हो गये है सब
आशिकी आजकल तो बस झमेले मे रहती है
झुठ के साथ तो सारी दुनिया खडी हो जाती है
सच्ची शख्सियत ही अक्सर अकेले मे रहती है
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