मुल्क के हालात ने सोने न दिया
भीगे से जज्बात ने सोने न दिया
फिजाओं मे जहर घोलते है लोग
फिजूल बयानात ने सोने न दिया
किसी को कोई पहचानता नही है
दुर के मुलाकात ने सोने न दिया
कही है जगमग कही अंधेरा क्यूं
चुभते सवालात ने सोने न दिया
मुल्क मे तो अब के सुखा पड़ा है
आंखो से बरसात ने सोने न दिया
रिश्तो ने कभी भी मुरव्वत न की
हमको लिहाजात ने सोने न दिया
हाथो की लकीरे सब उलझी सी है
नसीब के करामात ने सोने न दिया
अवाक है सभी बाजारो को देखके
मंहगाई के सौगात ने सोने न दिया
जितना करीब गया दूर हो जाती हैं
खुशी की औकात ने सोने न दिया
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