Friday, 20 November 2015

गुजर कर देखिये

कभी उनकी गलियों से भी गुजर कर देखिये
मुफलिसो की बस्तियों मे भी उतर कर देखिये

मजबूरी मे जिंदगी से किस कदर वो लड रहे
साथ उनके एक दिन आप बसर कर देखिये

भुखे बच्चे रोते देख कलेजा मुंह को आता है
कोई लम्हा ऐसे अहसास से गुजर कर देखिये

बडे बडे त्योहार यूँ ही फाको मे बित जाते हैं
नये जानकर रफूगर लिबास पैहर कर देखिये

रात रात भर आंसूओ को उबालती रहती है
माँ कभी सोती नही है आप जागकर देखिये

ख्वाहिशें दम तोडती रहती है अक्सर हर वक्त
कभी फुर्सत लम्हो मे निगाहे उधर कर देखिये

उम्मीद भरी निगाहे ताकती रहती है चहुंओर
उनकी झोली मे कुछ नजारे नजर कर देखिये

मेरे मालिक ने गरचे काबिलियत अता की है
जरूरतमंदी मे तुम भी कभी मेहर कर देखिये

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