Thursday, 5 November 2015

बेबसी के उस हालात ने सोने न दिया

बेबसी के उस हालात ने सोने न दिया
कुछ चुभते सवालात ने सोने ने दिया

आपको भी प्यार है की नही है हमसे
इस तरह के जज्बात ने सोने न दिया

खाली पतीले मे चला रही थी चमचा
बेबस माँ को उस रात ने सोने न दिया

जगमगाते शहर की बस्ती मे अंधेरा है
खुशी के ऐसे सौगात ने सोने नेे दिया

हम तो ताउम्र उनकी बाट जोहते रहे
वो खयाले मुलाकात ने सोने न दिया

मुफलिस बस्तियों मे शीरी बांटते फिरे
ऐसे दिखावटी खैरात ने सोने न दिया

उम्मीद रजामंदी की उनसे रही हमको
उखड़े उखड़े जवाबात ने सोने न दिया

जब भी मिलता वो दिल्लगी करता है
उसके दिल फरेब बात ने सोने न दिया

No comments:

Post a Comment