दिल फरेबी झुठे इश्तेहारो से डर लगता है
हमे तो आजकल बाजारो से डर लगता है
जरूरतो के तकाजे मे जज्बात बेच देते है
हमे इन बाजारू किरदारो से डर लगता है
मुफलिस बस्तियों मे पसरा रहता है अंधेरा
ये देख के जगमग त्योहारो से डर लगता है
अल सुबह ही खबरे लूट फसाद औ दंगो के
हमको रोज आते अखबारो से डर लगता है
फनकारीयां सियासत के हाथो नाचने लगी
अहले दानिश मंद फनकारो से डर लगता है
मौकापरस्ती खेल रही दैरो हरम का खेल
अवाम है दांव पे गुनहगारो से डर लगता है
भुखमरी बेबसी से आजीज आ चुके है वो
उन गरीब बस्ती के लाचारो से डर लगता है
वादे ही खिलाती है बस राहतो के नाम पर
मुझे मेरे मुल्क की सरकारो से डर लगता है
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