Tuesday, 15 September 2020

फासला ये जो दरमियानी है

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फ़ासला ये जो दरमियानी है 
कल जो गुज़री है वो कहानी है

जिंदगी ख़्वाब या हक़ीक़त है 
जो भी है रस्म तो निभानी है

कल मुलाक़ात हो गई उनसे
जिनसे पहचान कुछ पुरानी है 

आ गयी सामने फिर आंखो के 
याद बिसरी बहुत सुहानी है

दर्द ही उम्र भर निभाएगा
हर खुशी अब हुई बेगानी है 

फिर बिछड़ जाएंगे यकीनन वो
जिनसे चाहत बड़ी पुरानी है 

हम अकेले नही बीमार उनके 
सारी दुनिया लगे दीवानी है

पहले किस्तों में मौत आयी है
खुदकुशी बाद की कहानी है

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