क्या पता अब कि धोखा नही आएगा
सोचते क्या हो मौका नही आएगा
बाज फितरत से अपनी वो आ जाएगा
यूँ सहल तो भरोसा नही आएगा
लोग आदत से अपनी यूँ मजबूर हैं
है न मुमकिन दोबारा नही आएगा
पीठ पर वार करना है उसका शगल
सामने से वो सहसा नही आएगा
सावधानी बरतना जरूरी ही है
बोल कर कोई मसला नही आएगा
सीख लो खोल कर आंखें सोना सदा
हर दफा इत्तिला ना नही आएगा
खूब शातिर है दुश्मन संभलिये जरा
लौट कर वक्त गुजरा नही आएगा
यूँ गया शहर से जाने वाला मियां
जैसे फिर वो कभी क्या नही आएगा
कहते हैं आदमी वो भला है मगर
उसकी सोहबत से शुहरा नही आएगा
हार मत मानिए मुश्किलों से कभी
हौसला देख मसला नही आएगा
एक लम्हा गुजरता नही बिन तेरे
हिज्र हमको गवारा नही आएगा
बाद मरने के भी ख्वाब बाकी रहे
कब्र में अब इजारा नही आएगा
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