2122 1212 22
दर्द पर आंसूओं के पहरे हैं
आ के ये कोर पर ही ठहरे हैं
चोट चाहे कहीं भी हो लेकिन
रब्त दिल से बहुत ही गहरे हैं
अब सदाएं भी दे तो क्या किसको
सब यहाँ पर तो गुंगे बहरे हैं
कौन से ख्वाब छोड़ दूँ मैं भला
ख्वाब सारे बहुत सुनहरे हैं
जो गुजारी है जिंदगी हमने
अच्छे अच्छे भी देख सिहरे हैं
जितने किरदार आजकल है मिले
सारे मायूस से ही चेहरे हैं
दफ्न हर राज कर लिए लेकिन
दाग अब की कफन पे गहरे हैं
खुद को शायर तो कह नही सकते
बस ये कुछ शे'र से ककहरे है
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