Tuesday, 15 September 2020

यूँ भी उसने बरगलाया देर तक

2122 2122 212 
यूँ  भी  उसने   बरगलाया   देर तक
आने  की  कहकर न आया देर तक

उनकी खातिर तो ये ठहरी मसखरी
इस  अदा  ने  दिल दुखाया देर तक 

कुछ  मुरादों  के  मुकम्मल  के लिए 
दर ब दर  मैं  सर  झुकाया  देर तक

की  बड़ी शिद्दत से  कोशिश बारहा 
पर  न  उसको  भूल  पाया देर तक

साथ  सुनते  थे  कभी जो गीत हम 
अब  मै  तन्हा  गुनगुनाया  देर तक

बस   जरा  सी   देर   आने  में  हुई
मां  ने  घर  में  जी  उठाया देर तक

कुछ हुनर  सिखला  दिये थे बापू ने
जिंदगी  में   काम   आया   देर तक

दर्द   को  भी  दर्द  जब  होने  लगा
देख  कर   मैं   मुस्कुराया   देर तक

झूम कर बरसे हैं बादल आज फिर 
छप्परों   ने   घर   बचाया   देर तक

एक  है   ओढ़ू  बिछाऊं  क्या  करूँ
भीगे   चादर   ने   रूलाया  देर तक

कुछ    तमन्ना   आरजू    उम्मीद में 
घिर  के  दिल ये छटपटाया देर तक

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