Tuesday, 15 September 2020

सुखे फूल के जैसे रिश्ते खुश्बू से मिलवाएं कौन

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सुखे  फुल  के   जैसे  रिश्ते   खुशबू  से  मिलवाएं  कौन
कुछ  अहसास   सिरहाने  रख्खे  नींदो  में  सुलाए  कौन

तिनका  पत्ता   खुशबू  सब  ही   आंधियों  में   उड जाते 
दर्द   दिलो  मे  पसरा  है  जो  आंधी  तक  ले जाए कौन

दिन   ढलते  ही   आवारा   बन   मारा  मारा    फिरता है
काली  चादर   ओढ़  के  सोया   सूरज  को  जगाये कौन

दु पहरी  में    साया  अपना   कद  से   ऊंचा   हो   जाता 
बाद  दु पहरी  साये  को  फिर खुद से ही  मिलवाए कौन

धुंए  में  हरदम  जलती  है  मां  की  आंखें  सच  ये  नहीं
बेटों  की  तकलीफ  में  भी   बहते  हैं अश्क बताये कौन

बाप ने चिपका ली चेहरे पर फिर से उधार की खुशियां है 
माँ  के  पल्लू   में  छिप  रोती   बेटी  को  समझाये  कौन

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