Tuesday, 15 September 2020

साफ़ मन चाहिए साफ मन के लिए

212 212 212 212 
साफ   मन  चाहिए  साफ मन के लिए
पालिए   यूँ  न   नफरत  पतन के लिए

फूल  खूशबू से  गुलशन ये गुलजार हो
है  महकना   जरूरी   चमन   के  लिए

क्या  हुआ   गर   परेशान   हैं  जिंदगी
कुछ  नया  तो  नही  आदतन  के लिए

हसरतें   उम्र  भर   ही  रहे   आंच  पर
है ये मुश्किल बहुत  आमजन के लिए

कहने  सुनने  की  बस  बात होने लगी 
कुछ कहा ना किसी ने भी मन के लिए

हक बयानी  की  बातें  बहुत  हो  चुकी
क्या किया कुछ कहो तो वतन के लिए

मुल्क को इस समय  इसकी दरकार है
ये   लहू   मेरा  लो  आचमन  के  लिए

उम्र  भर    खुश्बुओं  में   नहाता   रहा
तू   महकते  हुए   एक   तन  के  लिए

रूह  फिर  भी  महकने  न  पायी तेरी
ये  जरूरी  नही  था   बदन   के  लिए

मसअलो  के  भी  चेहरे  बदलने  लगे
अब  कहाँ  शोर  है  आमजन के लिए

झंडे बैनर को रख लो जतन कर जरा
काम  आयेंगे  ये  ही  कफ़न  के लिए

भूख    रोटी   के    मुद्दे    पुराने   हुए
अब  नये  लाओ  नारे सदन  के लिए

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