212 1212 1212 1212
रुठते नही है अब कि कौन फिर मनायेगा
पूछने उदासियों की कौन फिर से आयेगा /1/
बांध रख्खा है घरों से कुछ रुहानी रब्त ने
वरना दर दिवार से ही कौन मिलने जायेगा /2/
बैठा दर्द पहलू में ही जैसे कोई यार है
इतनी कुर्बतें भला यूँ कौन अब निभायेगा/3/
यूँ नुमाइशें तो हम न करते अपने जख्म की
रिसते जख्म पर दवा भी कौन अब लगायेगा/4/
है कोई तो रात और भी ये रात बाद इक
चांद से भला ये बात कौन अब बतायेगा /5/
जब लगा कि जिंदगी को पढ लिया पुरी तरह
खुद ही खुद पे हंस पड़े यूँ कौन बरगलाएगा/6/
पर कतर के धर दिये हैं ख्वाहिशों के हमने अब
पर" बगैर ये परिंदे कौन अब उडायेगा/7/
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