Tuesday, 15 September 2020

मिलती नही कहीं भी खुशी है उधार में

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मिलती  नही   कहीं  भी   खुशी  है   उधार में
लाखों   मिलेंगे    आपको     बेबस   कतार में /1/

बर्बादियों  में   मेरे   तो   वो   भी   शरिक  था
गुजरी  है   उम्र   जिसके   फकत  इंतेजार  में/2/

कीमत  हमेशा   ख्वाब  की   ज्यादा  रही  मेरे
औकात    कब    रहे    हैं    मेरे   इख्तियार में/3/

गहरी  कही  है   जो  भी  कही   बात  यार  ने
रख्खा है  क्या  भला  कहो  नफरत में  रार में/4/

हर शख़्स उलझनों में ही उलझा हुआ है जब
फुर्सत है  कौन  जिसके  है  नफरत विचार में/5/

ताजिर  नफरतों  के  कुछ करते हैं मुझपे तंज
निखरा  हूँ   और   तप  के  मैं  यूँ  बार बार में/6/

रिश्तों  के  दरमियाँ    न  यूँ   दीवार   किजिए
है  लुत्फ़  इक  अलग   जरा  अपनों से हार में/7/

रख्खे  है   सर  पे   हाथ    मेरा  श्याम सांवरा
चलती  है     जिंदगी      इसी    दारोमदार  में/8/

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