2122 1122 1122 22
कह जो दें आबरू इज्जत ही उतर जाएगी
मौन रहने पे तबीयत ही न मर जाएगी
लोग कहते हैं मिडिल क्लास जमाने में जिसे
उसकी फरियाद भला कैसे उधर जाएगी
कोई इमदाद की उम्मीद नही है कुछ भी
आस करते हुए बस उम्र गुजर जाएगी
जिंदगी लोन पे है खुशियां हर इक लोन पे है
सांसे गिरवी है तकाजो से बिखर जाएगी
हाथ फैलाते हुए सामने आती है अना
हाथ पर हाथ धरे भूख न पर जाएगी
दौरे हालात इजाजत ही नही देते हैं
कब तलक यूँ ही बिलखते ये उमर जाएगी
मेरी थाली में नही चांद उतर पाया कभी
अब के भी ईद मेरी यूँ ही गुजर जाएगी
वक्त मुश्किल है बहुत हाल बुरा है साहब
मौत के बाद ही क्या तुझको खबर जाएगी
मेरे छोटे से समंदर का किनारा टूटा
मसनदे साही की कब नजरे इधर जाएगी
ठोकरें खूब लगी पर न पुकारा पहले
आज टूटने पे मेरी हस्ती ही मर जाएगी
ये न हो पाया न कर पाये वो कुछ मिल न सका
बस यही सोचते ये जीस्त गुजर जाएगी
तंग दस्ती है मेरी तर्ह मेरी किस्मत भी
गर्दिशे दौर में जल्दी ही बिखर जाएगी
मान रख्खा है मेरे रब ने गरीबी का मेरे
तारीखें मौन यूँ रह और सुधर जाएगी
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