2122 2122 2122 212
रूह से चल जिस्म तक होती बगावत देखिये
दिल से दिल के दरमियाँ कैसी अदावत देखिये /1/
किस कदर मायूस तेरे शहर से हम लौटे है
तेरे दर तुझसे न मिलने की मलालत देखिये/2/
तेरी रूसवाई का अहसास अश्क को भी हो रहा
सुख गई आंखे ही रिश्तों की नजाकत देखिये/3/
आशनाई मे तेरी मशहूर इतने हम हुए
और खबर तुझको नही हद ही जलालत देखिये/4/
जब मिले खामोश गुजरे हैं वो कतराते हुए
हाल फिर पूछे रकीबो से अदायत देखिये/5/
क्या खबर दैरो हरम उसको ही जाना है खुदा
आस्ताने भूले सारे क्या अकीदत देखिये/6/
है सजी महफिल वहां पर और सन्नाटा यहां
भेज न्यौता भी रहे हैं क्या शराफ़त देखिये/7/
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