1222 1222 1222 1222
तमन्ना आरजू उम्मीद कुछ जाया नही जाता
मुहब्बत गर हो शिद्दत से तो झुठलाया नही जाता
खयालो में तो वो आते ही रहते हैं मियां अक्सर
हकीकत में मगर उनसे कभी आया नही जाता
है उनके दिल में क्या अब ये भला कैसे बताएँ हम
मगर हमसे कभी वो शख़्स बिसराया नही जाता
किये ताउम्र जिनपे हमने न्योछावर दिलों जां सब
हमारे हाल पर आंसू भी छलकाया नही जाता
कभी हम रूबरू ना हो रजा उनकी ही ऐसी थी
तो फिर बाजार में हमसे क्यूँ कतराया नही जाता
मजे लेकर वो वहशत पे हमारी करता है चर्चा
कभी भी राज उनके हमसे बतलाया नही जाता
हमारी मौत भी नाराजगी न खत्म कर पायी
चढ़ाने कब्र पे दो फूल तक आया नही जाता
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