2122 2122 2122
क्या बताएँ क्या हुआ है अब खुशी को
कैसे दें इल्ज़ाम कुछ भी इस सदी को/1/
गल्तियां कुछ तो यकीनन ही हुई है
जो भुगतना पड़ रहा है आदमी को/2/
गर बनाना है सहल जीने का रस्ता
गौर करना छोड़ दो तुम बतकही को/3/
क्या हुआ हालात बिगड़े हैं जरा तो
अहमियत मत दो जरा भी खुदखुशी को/4/
प्यास समंदर को भी लग सकती कभी है
क्या खयाल आया कभी भी ये किसी को/5/
वक्त कुरियर से कहो तो भेज दें हम
अब बहाने मत करो तुम वापसी को/6/
कर लिया बर्बाद हिस्सा उम्र का इक
और कितना दें तवज्जो अजनबी को/7/
चांद है मिट्टी का इक धेला सरीखा
ये मगर कहना नही तुम चांदनी को/8/
हमने माना था अहम दिल की लगी को
अहमियत तुमने मगर दी दिल्लगी को/9/
लग रहा उनींदी सा सूरज सवेरे
रात भर ताका किये हैं क्या किसी को/10/
रात सिरहाने खड़े थे ख्वाब सारे
पर इजाजत थी न आने की किसी को/11/
अब नही आते कहीं छत पर परिंदे
दाने भी रखते नही देखा किसी को/12/
जिंदगी है बे बहर बे काफिया सी
ना मुकम्मल सा मिला मिसरा खुदी को/13/
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