Tuesday, 15 September 2020

सवालों से पहले जवाब आ गया

122 122 122 12
सवालों   से   पहले   जवाब  आ  गया
हर  इक   चेहरे  पर   नकाब  आ  गया

गुनाहों   की   ताकीद    से   पहले   ही
गुनाहों   का    लब्बोलुआब  आ   गया

गया  था   जो  रोटी  कमाने  को  कल
फकत  भूख  लेकर   जनाब आ  गया

नदारद  है   आंखों   से    नींदें    कहीं
बिचारा सा बन कर के ख्वाब आ गया

बड़ा     बदनसीबी     भरा     दौर   है
हर  उम्मीद  पर  ही  सराब  आ  गया

मशक्कत  मुसलसल  ही  चलती रही
तभी  कुछ  नया सा खिताब आ गया

अभी  गम  सुखाने  को  डाले  ही  थे
कहाँ  से  भटकता  सिहाब  आ  गया

कही  पर   करोना   कहीं   जलजला
कही  राह  चलते   अजाब  आ  गया

जो कुदरत पे अब तक  बसर ने किये
वो  सारे  सितम का  हिसाब आ गया

लहू   में   सनी    आ   रही    रोटियाँ
गरीबी  का  देखो   शबाब  आ   गया

न  थी   बेहिसी   पहले  इतनी  कभी
भला  वक्त अब  क्यूँ खराब आ गया

तरसते थे जिस वक्त को कल तलक
वो फुर्सत  समय  बे हिसाब आ गया

बड़ा  ही  अजब  दौर   आया  मियां
सभी  को  मजा  लाजवाब आ गया

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