122 122 122 12
सवालों से पहले जवाब आ गया
हर इक चेहरे पर नकाब आ गया
गुनाहों की ताकीद से पहले ही
गुनाहों का लब्बोलुआब आ गया
गया था जो रोटी कमाने को कल
फकत भूख लेकर जनाब आ गया
नदारद है आंखों से नींदें कहीं
बिचारा सा बन कर के ख्वाब आ गया
बड़ा बदनसीबी भरा दौर है
हर उम्मीद पर ही सराब आ गया
मशक्कत मुसलसल ही चलती रही
तभी कुछ नया सा खिताब आ गया
अभी गम सुखाने को डाले ही थे
कहाँ से भटकता सिहाब आ गया
कही पर करोना कहीं जलजला
कही राह चलते अजाब आ गया
जो कुदरत पे अब तक बसर ने किये
वो सारे सितम का हिसाब आ गया
लहू में सनी आ रही रोटियाँ
गरीबी का देखो शबाब आ गया
न थी बेहिसी पहले इतनी कभी
भला वक्त अब क्यूँ खराब आ गया
तरसते थे जिस वक्त को कल तलक
वो फुर्सत समय बे हिसाब आ गया
बड़ा ही अजब दौर आया मियां
सभी को मजा लाजवाब आ गया
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